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लखनऊ में ज़मीन और संपत्ति विवाद के वकील

स्वामित्व, कब्ज़ा, बंटवारा, अतिक्रमण, खतौनी और दाखिल-खारिज के मामले, और ख़रीदने से पहले संपत्ति के कागज़ों की जांच।

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ज़मीन और मकान के विवाद अक्सर सालों चलते हैं, इसलिए शुरुआत में सही रास्ता चुनना बहुत ज़रूरी है। कुछ मामले सिविल अदालत में जाते हैं, कुछ राजस्व अदालत में और कुछ UP RERA में। मैं आपके कागज़ देखकर बताता हूं कि आपका मामला कहां और कैसे चलेगा।

मैं किन मामलों में सहायता करता हूं

  • स्वामित्व की घोषणा, कब्ज़ा और स्थायी या अस्थायी निषेधाज्ञा के वाद
  • पैतृक और पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा
  • आपकी ज़मीन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण
  • धोखे से कराए गए बैनामे, दानपत्र और वसीयत को रद्द कराना
  • उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के तहत दाखिल-खारिज और राजस्व अदालतों के अन्य मामले
  • रेरा अधिनियम, 2016 के तहत UP RERA में बिल्डर के ख़िलाफ़ शिकायत
  • मकान मालिक और किरायेदार के विवाद
  • बैनामे, इक़रारनामे (एग्रीमेंट टू सेल) और मुख़्तारनामे (पावर ऑफ़ अटॉर्नी) की जांच

ख़रीदने से पहले

बहुत से संपत्ति विवाद इसलिए शुरू होते हैं क्योंकि ख़रीदने से पहले स्वामित्व की पूरी कड़ी नहीं देखी गई। भुगतान से पहले स्वामित्व के कागज़, राजस्व अभिलेख और भार (एन्कम्ब्रेंस) की जांच और इक़रारनामे की समीक्षा करा लें। यह बाद में मुक़दमा लड़ने से कहीं सस्ता है।

जब कोई आपकी संपत्ति में दख़ल दे

अगर कोई आपके कब्ज़े में दख़ल दे रहा है या विवादित संपत्ति बेचने की धमकी दे रहा है, तो अस्थायी निषेधाज्ञा की अर्ज़ी से मुक़दमे के फ़ैसले तक स्थिति बचाई जा सकती है।

पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा

बंटवारे के विवाद अक्सर पंजीकृत पारिवारिक समझौते या बंटवारा विलेख से सबसे अच्छी तरह सुलझते हैं। जहां यह संभव न हो, वहां बंटवारे का वाद हर सह-स्वामी का हिस्सा तय करता है।

पहले परामर्श में क्या लाएं

  • बैनामा या अन्य स्वामित्व विलेख
  • खतौनी या अन्य राजस्व प्रविष्टियां और दाखिल-खारिज के आदेश
  • गृहकर की रसीदें और बिजली या पानी के बिल
  • अब तक का कोई नोटिस, शिकायत या अदालत का आदेश

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोई मेरी ज़मीन पर कब्ज़ा या निर्माण कर रहा है, तुरंत क्या करूं?
सिविल वाद के साथ अस्थायी निषेधाज्ञा (टेम्परेरी इंजंक्शन) की अर्ज़ी देकर मुक़दमे के फ़ैसले तक स्थिति को सुरक्षित कराया जा सकता है। अपने स्वामित्व और कब्ज़े के सारे दस्तावेज़ इकट्ठा करें।
दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) का मामला कहां चलता है?
दाखिल-खारिज और राजस्व अभिलेखों से जुड़े मामले उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के तहत राजस्व अदालतों में चलते हैं।
क्या बेटियों का पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सा है?
हां। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 में 2005 के संशोधन के बाद बेटियों को हिंदू संयुक्त परिवार की संपत्ति में बेटों के बराबर सहदायिक अधिकार हैं। इससे कई परिवारों में हिस्से बदल जाते हैं।
धोखे से कराया गया बैनामा रद्द हो सकता है?
धोखाधड़ी से कराए गए बैनामे (सेल डीड), दानपत्र या वसीयत को रद्द कराने के लिए सिविल वाद दायर किया जा सकता है।
बिल्डर ने फ़्लैट देने में देरी की है, कहां शिकायत करूं?
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के तहत UP RERA में बिल्डर के ख़िलाफ़ शिकायत दी जा सकती है। कुछ मामलों में उपभोक्ता आयोग भी एक रास्ता है।

यह जानकारी केवल सामान्य समझ के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। हर मामले का परिणाम उसके अपने तथ्यों और लागू क़ानून पर निर्भर करता है।

यह जानकारी अंग्रेज़ी में: Property and land dispute lawyer in Lucknow

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